Interesting Facts Space Life in Hindi
- आज हम आपको अन्तरिक्ष में अतरिक्ष यात्रा के दौरान होने वाले प्रभावों के बारे में बता रहे है के जब कोई आदमी अन्तरिक्ष की यात्रा करता है तो उन्हें कौनसी मुश्किलों का सहमना करना पड़ता है । क्योंकि एक आम आदमी के लिए अन्तरिक्ष यात्रा का अनुभव करना आसान नहीं होता ।
चलिए जानते हैं …..
- जब कोई यात्री अन्तरिक्ष यात्रा के लिए जाता है उस समय ध्वनी का स्तर 100 डेसिबल से भी ज्यादा हो जाता है यो अन्तरिक्ष यात्री की सहन शक्ति से ज्यादा है । अन्तरिक्ष यात्रा के समय यात्री के सुनने की शक्ति पर भी प्रभाव पड़ता है।
- जैसे – जैसे यात्री अन्तरिक्ष की तरफ़ बढ़ने लगता है पृथ्वी का गुरुत्वा बल धीरे – धीरे कम होने लगता है। अन्तरिक्ष में यात्रा करते समय अन्तरिक्ष यान में यात्री को गुरुत्व बल अपकेन्द्र बल द्वारा संतुलित कर दिया जाता है ।
- अन्तरिक्ष यात्री के लिए अन्तरिक्ष यान को इस प्रकार नियन्त्रण किया जाता है के यात्री को पृथ्वी के वातावरण के हिसाब से रखा जाए ।
- धरती का वायुमंडल इस प्रकार से बना हुआ है के वो सूर्य की आने बाली हानिकारक विकिरणों और पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा करता है परन्तु अतरिक्ष में ज्यादा दूर जाने पर यह सुरक्षा कवच हमसे दूर हो जाता है। इसीलिए इससे निपटने के लिए भी प्रबंध किया जाता है ।
- परन्तु पिछले कुछ समय के चलते अन्तरिक्ष यात्रियों की पोशाक में कई तरह के बदलाव किए गए हैं। अब तक शूट में कई तरह के बदलाव किए जा चुके हैं । अब अन्तरिक्ष यात्री के लिए ऐसी पोशाक का निर्माण किया जा रहा है जिससे वो चारों तरफ़ एक छोटे से घर का काम करती है जिसमे यात्री की सुविधा का सारा समान मौजूद रहता है । पहले अन्तरिक्ष यात्री के लिए सांस लेने के लिए 10 प्रतिशत ओक्स्सीजन दी जाती थी परन्तु अब ओक्स्सीजन और नाईट्रोजन को आपस में मिला दिया जाता है । इसके इलावा इस पोशाक में यात्री के द्वारा सांस के द्वारा छोड़ी जाने बाली कार्बोन डाईओक्स्साईड को दूर करने के लिए भी तकनीक इस्तेमाल की गई है।
- अन्तरिक्ष यात्री गिलास में पानी नहीं पी सकता गिलास के जरिए किसी तरह भी पानी नहीं पिया जा सकता है। गिलास के थोडा सा हिलते ही पानी कक्ष में गोलिया बन कर तैरने लगता है। इसीलिए अन्तरिक्ष यात्री अन्तरिक्ष में पानी पीने के लिए एक सिलंडर का इस्तेमाल करते हैं जिसमे पानी भरा होता है। और सिलंडर के साथ एक पाइप जुड़ा होता है और उस पाइप को मुंह में डालकर पानी पीते हैं।
- अब आप सोचते होंगे के अन्तरिक्ष यात्री भोजन कैसे करते होंगे ? अन्तरिक्ष यात्री को भोजन करने के लिए भी काफी समस्या का साहमना करना पड़ता है। अन्तरिक्ष में आग नहीं जलाई जा सकती है। ओक्स्सीजन के बिना आग भी नहीं जलाई जा सकती है क्योंकि कार्बनडाई ऑक्साइड ज्वाला के चारों तरफ इक्कठी हो जाती है। इसीलिए अन्तरिक्ष यात्रियों को अपना भोजन पेस्ट के रूप में लेना पड़ता है। अगर वो सूखे भोजन अपने साथ लेकर जाएंगे तो वो हवा में तैरने लगेंगे। इसीलिए यात्री पृथ्वी से ही अपना भोजन बनाकर लेकर जाते हैं भूख लगने पर यात्री सिलेंडर में मौजूद पेस्ट को एक नाली के द्वारा ग्रेहन करते हैं।
- अन्तरिक्ष में यात्री को हर 90 मिनट के बाद सूर्यास्त देखना पड़ता है। अन्तरिक्ष में कभी सूर्य की रौशनी होती है तो कभी बर्फ़ और ठंड का मौसम होने लगता है इस बदलते मौसम से बचने के लिए अन्तरिक्ष यान के ताप को द्रव परिसंचरण मशीन के दवारा स्थिर रखा जाता है। जिससे अन्तरिक्ष यात्री को बदलते मौसम का बिल्कुल भी एहसास नहीं होता।
- अन्तरिक्ष यात्री को सोने में भी काफ़ी मुश्किलों का साहमना करना पड़ता है। उन्हें सोने के लिए अपनी आखों पर पट्टी बांधनी पडती है और अपने आप को एक स्थिति में रखना पड़ता है ताकि वो इधर – उधर से टकराने से बच सकें।
- अन्तरिक्ष में टॉयलेट करना भी मुश्किल भरा काम होता है । अन्तरिक्ष की ख़ोज एजेंसियों ने इसके समाधान के लिए काफ़ी कोशिशें की हैं । अब अन्तरिक्ष में टॉयलेट के लिए एयर फ़िल्टरिंग का इस्तेमाल किया जाता है ।
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