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ऊष्मागतिकी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और व्यापक रूप में विज्ञान का ही महत्वपूर्ण और मूलभूत विषय रहा है। ऊष्मागतिकी विज्ञान की वह शाखा है जिसमें यान्त्रिक कार्य तथा ऊष्मा मेँ परस्पर सम्बन्ध का वर्णन किया जाता है, यह प्रमुख रुप से यान्त्रिक कार्य तथा ऊष्मा के परस्पर रुपान्तरण से सम्बन्धित है।
ऊष्मागतिकी के मुख्यतः दो नियम है-
- यदि किसी निकाय को H ऊष्मा देते हैं तो दी गयी ऊष्मा का कुछ भाग निकाय की आन्तरिक ऊर्जा मे वृद्धि (ΔI) तथा शेष ऊष्मा निकाय द्वारा कार्य करने मेँ व्यय होती है। H= ΔI+W
- ऊष्मा का पूर्ण रुप से यान्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तन असम्भव है।
शाखाओं का विकास[संपादित करें]
ऊष्मागतिकी की मुख्य शाखाओं का प्रादुर्भाव लगभग निम्नलिखित समयावली ले अनुसार हुआ-
- उष्मारसायन - 1780 के दशक में
- चिरसम्मत उष्मारसायन - 1824
- रसायन ऊष्मागतिकी - 1876Thermoeconomics
- सांख्यिकीय यांत्रिकी - c. 1880s
- साम्यवस्था ऊष्मागतिकी
- अभियांत्रिकी ऊष्मागतिकी
- Chemical engineering thermodynamics - c. 1940s
- Non-equilibrium thermodynamics - 1941
- Small systems thermodynamics - 1960s
- Biological thermodynamics - 1957
- Ecosystem thermodynamics - 1959
- Relativistic thermodynamics - 1965
- Quantum thermodynamics - 1968
- Black hole thermodynamics - c. 1970s
- Geological thermodynamics - c. 1970s
- Biological evolution thermodynamics - 1978
- Geochemical thermodynamics - c. 1980s
- Atmospheric thermodynamics - c. 1980s
- Natural systems thermodynamics - 1990s
- Supramolecular thermodynamics - 1990s
- Earthquake thermodynamics - 2000
- Drug-receptor thermodynamics - 2001
- Pharmaceutical systems thermodynamics – 2002
ऊष्मागतिकी के कुछ विचार दूसरे क्षेत्रों में भी प्रयुक्त हुएहैं-
- Thermoeconomics - c. 1970 के दशक में
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